पेले की जीवनी Pele Biography in Hindi

पेले की जीवनी Pele Biography in Hindi

पेले को 20वीं सदी का महानतम फुटबॉल खिलाड़ी माना जाता है. वे ब्राजील के लिए तीन बार फुटबॉल विश्व कप जीतने वाली टीमों में शामिल रहे हैं.

संक्षिप्त जीवनी Brief Biography

विश्व के महानतम फुटबॉल खिलाड़ियों में शामिल पेले का मूल नाम एडसन एरेंट्स डी नासिमेंटो है. वे ब्लैक पर्ल उपनाम से भी विख्यात हैं. पेले के अलावा शायद ही ऐसा कोई खिलाड़ी हुआ हो जो अपने दोनों पैरों और सिर से गोल करने की बराबर क्षमता रखता हो.
विश्व विख्यात फुटबॉल खिलाड़ी पेले का जन्म 23 अक्टूबर 1940 को ब्राजील के मिनास गेराइस प्रांत के ट्रेस कोरासोइस में हुआ था. पेले का मूल नाम एडसन एरेंटस डी नासिमेन्टो है. पेले का बचपन बहुत गरीबी में बीता. उन्हें शुरुआत में अपना पेट पालने के लिए जूते पॉलिश तक करने पड़े, लेकिन फुटबॉल के लिए अपना जुनून उन्होंने खत्म नहीं होने दिया.
1958 के फुटबॉल विश्व कप में अपने प्रदर्शन से पेले पूरी दुनिया में छा गए. पेले का खेल करियर करीब दो दशक तक चला. उन्होंने तीन विश्व कप में ब्राजील को जीत दिलाई.
पेले का फुटबॉल करियर 22 वर्ष तक चला, इस दौरान उन्होंने 1363 मैच खेले. इन मैचों में उन्होंने 1261 गोल किए.

नाम पेले
व्यवसाय फुटबॉलर
मूल नाम एडसन एरेंटस डी नासिमेन्टो
जन्म एवं स्थान 23 अक्टूबर 1940, ट्रेस कोरासोइस (ब्राजील) में
उपलब्धितीन बार फुटबॉल विश्वकप विजेता टीम के सदस्य

पेले का आरम्भिक जीवन Early Life of Pele

पेले का परिवार बहुत गरीब था. उनके पिता जो रैमोस डी नासिमेन्टो क्लब फुटबॉलर थे. चूंकि, ब्राजील में नाम बहुत बड़े होते हैं, इसलिए लोगों के उपनाम रखने का चलन आम है. पेले के पिता को भी डॉन्डिन्हो उपनाम से पहचाना जाता था. उनकी माता डोना सेलेस्टी अरांटिस एक गृहिणी थीं.
पेले के नाम की कहानी बड़ी दिलचस्प है. पेले के जन्म से पहले तक ब्राजील के कई और इलाकों की तरह उनके शहर तक भी बिजली नहीं पहुंची थी. इत्तफाक से जब पेले का जन्म हुआ, उन्हीं दिनों उनके शहर तक बिजली पहुंच गई और उनका घर भी बिजली के बल्ब की रोशनी में नहा उठा. पेले के माता-पिता इससे इतने खुश हुए कि उन्होंने अपने बेटे का नाम ही बल्ब की आविष्कारक थॉमस एल्वा एडिसन के नाम पर एडिसन रख दिया. लेकिन, पढ़े-लिखे होने के कारण उनसे एक चूक हो गई. एडिसन की स्पेलिंग Edison में से गलती से ‘i’ छूट गया. इस तरह उनका नाम एडिसन से एडसन Edson हो गया. इस तरह उनका पूरा नाम हुआ- एडसन एरेंटस डी नासिमेन्टो.
चलन के अनुरूप एडसन का भी उनके परिजन और दोस्तों ने उपनाम रख दिया. उन्हें डिको उपनाम से बुलाया जाने लगा.
पेले के पिता डॉन्डिन्हो खुद फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे. फुटबॉल में करियर बनाने के लिए डॉन्डिन्हो ट्रेस कोरासोइस से पेले सहित अपने पूरे परिवार को लेकर बौरू आ गए. लेकिन पैर में चोट लग जाने के कारण उन्हें खेलना बन्द करना पड़ा. लिहाजा, डॉन्डिन्हो अपने बेटे डिको में अपने अधूरे ख्वाब सच होते देखने लगे.

फुटबॉल खेलने की शुरुआत

डॉन्डिन्हो का फुटबॉल करियर खत्म होने से परिवार की माली हालत बिगड़ गई. उनकी गरीबी का आलम यह हो गया कि पेले को उनके बचपन में असली फुटबॉल भी खेलने को नहीं मिल पाती थी. वे अपने दोस्तों के साथ बौरू शहर की गलियों में अखबार और कपड़े से बनी फुटबॉल से खेला करते. पेले खाली वक्त में बौरू रेलवे स्टेशन पर बूट पॉलिश किया करते थे, ताकि परिवार को कुछ सहारा मिल सके.
असली प्रतिभा तो वही होती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी और निखरती है. ऐसा ही डॉन्डिन्हो के बेटे डिको के साथ भी था. 9-10 साल का डिको मैदान पर इतनी तेजी से फुटबॉल ड्रिबल करता था कि कोई उसे छू भी नहीं पाता था. इसी खूबी के कारण लोग उन्हें गैसोलिना कहकर बुलाने लगे.

पेले बनने का सफर

पेले की उम्र सिर्फ 11 साल की थी, जब ब्राजील के विख्यात खिलाड़ी वाल्डीमार डी ब्रिटो ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपनी यूथ टीम में शामिल किया. 1956 की गर्मियों में ब्रिटो अपने 15 साल के शिष्य पेले को साओ पाउलो ले आए. यह उनके करियर के लिहाज से बहुत बड़ा कदम रहा. उनके दमदार खेल की बदौलत उन्हें जल्द ही सेंटोस फुटबॉल क्लब से खेलने का मौका मिल गया.
साओ पाउलो में एडिसन उर्फ डिको उर्फ गैसोलिना सेंटोस फुटबॉल क्लब से जुड़ गए. सेंटोस क्लब के गोलकीपर बिले अपने खेल के कारण बहुत पसंद किए जाते थे. कई बार बिले के टीम में न होने पर डिको गोलकीपिंग करते थे. बिले की तरह वे भी शानदार बचाव करते थे. ऐसे में लोग उन्हें दूसरा बिले कहने लगे. ये बिले कब पेले हो गया, यह न तो स्वयं पेले को मालूम है और न ही उनके प्रशंसकों को.

पेले का फुटबॉल करियर Football Career of Pele

1958 का फुटबॉल विश्व कप

पेले महज 17 साल के थे, जब उनके उम्दा खेल को देखते हुए उन्हें वर्ष 1958 के फुटबॉल विश्व कप के लिए ब्राजील की टीम में शामिल किया गया. वे स्वीडन में खेले गए इस विश्व कप में छह गोल दाग कर सॉकर सुपरस्टार बन गए. ब्राजील ने सेमीफाइनल में फ्रांस को 5-2 से हराया, जिसमें 3 गोल अकेले पेले ने किए. फाइनल में ब्राजील ने मेजबान स्वीडन को हराया, जिसमें पेले ने 2 गोल किए.

जब पेले बने राष्ट्रीय धरोहर

उस वर्ष ब्राजील ने पेले की बदौलत ही पहली बार वर्ल्ड कप जीता. पेले को वर्ल्ड कप का बेस्ट फुटबॉलर घोषित किया गया. इसके बाद तो पेले को यूरोप के बड़े-बड़े फुटबॉल क्लब से खेलने का न्यौता मिलने लगा. इसे देखते हुए ब्राजील के तत्कालीन राष्ट्रपति ने पेले को ब्राजील की राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर दिया गया. इससे उन्हें दूसरे देशों के क्लब से खेलने का मौका मिलना मुश्किल हो गया. हालांकि, सेंटोस फुटबॉल क्लब की ओर से ही खेलते हुए उन्होंने खूब शोहरत और धन कमाया.

1962 का फुटबॉल विश्व कप

वर्ष 1962 में चिली में फुटबॉल विश्व कप के दौरान ही पेले को ग्रोइन इंजरी हो गई, जिससे वे फाइनल मुकाबले नहीं खेल पाए. इस साल, ब्राजील ने लगातार दूसरी बार फुटबॉल विश्व कप जीता. हालांकि, पेले ने दो ही मैच खेले और एक गोल किया.

1966 का फुटबॉल विश्व कप

चार साल बाद, इंग्लैंड में हुए फुटबॉल विश्व कप में विरोधी टीमों के डिफेंडर्स के आक्रामक खेल के कारण पेल एक बार फिर चोटिल हो गए. इस बार ब्राजील की टीम दो ही मैच खेल कर बाहर हो गई. पेले ने एक गोल किया.

1970 का फुटबॉल विश्व कप

1970 में मैक्सिको में हुए विश्व कप में पेले और ब्राजील ने शानदार वापसी की. पेले ने टूर्नामेंट में 4 गोल किए. ब्राजील ने फाइनल में इटली को 4-1 से हराया, जिसमें पेले ने एक गोल किया.

फुटबॉल से संन्यास Retirement from Football

पेले ने 1974 में फुटबॉल से संन्यास लिया. इसके अगले ही साल उन्होंने वापसी की और नॉर्थ अमेरिकन सॉकर लीग में न्यूयॉर्क कॉस्मॉस की ओर से खेलने लगे. उन्होंने अक्टूबर 1977 में अपना आखिरी मैच खेला. न्यूयॉर्क कॉस्मॉस और उनके पुराने क्लब सेंटोस के बीच हुए इस प्रदर्शनी मैच में पेले दोनों तरफ से खेले. इसके साथ ही उन्होंने फुटबॉल को अलविदा कहा.

पेले का निजी जीवन Personal Life of Pele

पेले ने तीन शादियां कीं. पहली शादी 1966 में रोजमैरी डोस चोल्बी के साथ हुई, जो 1982 तक चली. दोनों की दो बेटियां हुईं. 1981 से 1986 तक उनका टीवी प्रेजेंटर जुजा से अफेयर चला. 1994 में उन्होंने दूसरी शादी की. वर्ष 2016 में उन्होंने मर्सिया ओकी से शादी की. पेले की कुल सात संतानें हैं.

पेले को खेलते देखने के लिए गृह युद्ध थम गया

पेले का करिश्मा पूरी दुनिया में सिर चढ़कर बोलता था. 1960 के दशक में नाइजीरिया गृह युद्ध से जूझ रहा था. नाइजीरिया के सबसे बड़े शहर लागोस में एक प्रदर्शनी मैच में पेले को खेलना था. कहा जाता है कि पेले को खेलते देखने के लिए दोनों संघर्षशील गुटों ने 48 घंटों के लिए युद्ध विराम कर दिया था.

पुरस्कार और सम्मान Awards and Honors

खेल के मैदान से दूर होने के बाद भी पेले मानवता के काम में लगातार सक्रिय रहे. 1978 में उन्हें यूनिसेफ ने अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार से सम्मानित किया. 1995 में उन्हें ब्राजील का असाधारण खेल मंत्री भी बनाया गया. पेले को फीफा ने 1999 में संयुक्त रूप से 20वीं सदी का महानतम फुटबॉल खिलाड़ी भी घोषित किया.

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