Biography of Guru Dutt गुरु दत्त की जीवनी

गुरु दत्त की जीवनी Biograpahy of Guru Dutt

गुरु दत्त भारतीय फिल्म जगत के प्रसिद्ध अभिनेता, निर्माता और निर्देशक रहे हैं. उनकी ‘प्यासा’ और ‘कागज के फूल’ फिल्में टाइम मैगजीन की ऑल टाइम फेवरेट 100 फिल्मों में शामिल हुईं.

गुरु दत्त की संक्षिप्त जीवनी Short Biography of Guru Dutt

वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण जो कि गुरु दत्त के नाम से ज्यादा पहचाने जाते हैं, भारतीय फिल्म जगत के जाने माने अभिनेता, निर्माता और निर्देशक रहे हैं. ब्रिटिश राज के समय बंगलौर में जन्में गुरु दत्त का रुझान शुरुआत से ही अभिनय में था. उन्होंने 1950 से 1960 के दशक में प्यासा, कागज के फूल, साहिब बीबी और गुलाम एवं चौदहवी का चांद जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं. प्यासा और कागज के फूल को तो टाइम मैगजीन की ऑल टाइम फेवरेट 100 फिल्मों में शामिल किया गया है. ये फिल्में गुरु दत्त की भारतीय सिनेमा जगत को बेहतरीन तोहफा साबित हुईं. उन्हें भी बतौर अभिनेता शीर्ष 25 में जगह मिली. गुरु दत्त की फिल्में 1950 के दौर की सबसे बड़ी हिट फिल्में साबित हुईं. उनकी फिल्में फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे देशों में दोबारा रीलीज होने पर भी हाऊस फुल रहीं.

नामगुरु दत्त
वास्तविक नामवसंतकुमार शिवशंकर पादुकोण
जन्म एवं स्थान9 जुलाई, 1925, बेंगलूरु, कर्नाटक
व्यवसायअभिनेता, निर्माता एवं निर्देशक

गुरु दत्त का शुरुआती जीवन Early Life of Guru Dutt

गुरु दत्त का जन्म 9 जुलाई, 1925 को बंगलौर में हुआ था. हालांकि उनका असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था, लेकिन बचपन में हुई एक दुर्घटना के कारण परिवार वालों ने इसे बदल कर गुरु दत्त कर दिया. गुरु दत्त का परिवार कारवार से था, लेकिन बाद में वे बंगलौर में बस गए थे. वैसे गुरु दत्त का बचपन बंगाल के भोवानीपुर में बीता था और यही कारण था कि वह फर्राटेदार बंगाली भाषा बोल सकते थे.

गुरु दत्त का शुरुआती करयिर Career of Guru Dutt

सबसे पहले गुरु दत्त ने कोलकाता में लीवर ब्रदर्स फैक्ट्री में टेलीफोन ऑपरेटर की नौकरी की थी, लेकिन वे ज्यादा दिनों तक वहां टिक नहीं पाए. उसके बाद दत्त 1944 में अपने परिजनों के पास बॉम्बे (वर्तमान में मुम्बई) आ गए. बॉम्बे आने के बाद दत्त के जीवन को नई राह मिली. उनके चाचा ने उन्हें 1944 में पूना (अब पुणे) में प्रभात फिल्म कम्पनी में नौकरी दिला दी. दत्त ने उस कम्पनी से तीन साल का अनुबंध किया था. यही वह कम्पनी थी, जिसके लिए वी. शांताराम जैसे दिग्गज काम करते थे. लेकिन दत्त के इस कम्पनी से जुडऩे से पहले ही शांताराम ने अपनी नई कम्पनी कला मंदिर फिल्म्स शुरू कर दी थी. वैसे गुरुदत्त के लिए प्रभात फिल्म कम्पनी काफी भाग्यशाली साबित हुई. उन्हें यहां ऐसे दो लोग मिले जो कि जीवनभर उनके सबसे अच्छे दोस्त बनकर रहे. ये थे रहमान और देव आनंद जो कि हिन्दी सिनेमा के बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता रहे हैं.

शुरुआत में दत्त ने फिल्मों में छोटे-छोटे रोल निभाए, जैसे कि 1944 में आई चांद फिल्म में कृष्णा का रोल. वहीं 1945 में उन्होंने विश्राम बेडेकर की फिल्म लखरानी में अभिनय करने के साथ ही सह निर्देशन भी किया. 1946 में दत्त ने पी.एल. संतोषी की फिल्म हम एक हैं में सह निर्देशन के साथ-साथ नृत्य निर्देशन भी किया. 1947 में जाकर यह अनुबंध खत्म हुआ. दत्त की मां ने फिर उन्हें प्रभात फिल्म कम्पनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बाबुराव पाई के साथ स्वतंत्र सहायक के तौर पर काम दिलवा दिया. हालांकि इतने अनुभव के बावजूद भी दत्त लम्बे समय तक बेरोजगार रहे. वे बॉम्बे के माटुंगा में ही अपने परिवार के साथ रहने लगे थे. इस दौरान दत्त ने अंग्रेजी में अपनी लेखनी को और बेहतर बनाया और जल्द ही वे एक अंग्रेजी पत्रिका दी इल्युस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया के लिए लेख लिखने लगे थे.

अभिनेता, सह-निर्देशक व नृत्य निर्देशक Guru Dutt as Actor and Choreographer

प्रभात फिल्म कम्पनी ने दत्त को नृत्य निर्देशक के तौर पर नौकरी दी थी, लेकिन उन्हें अभिनेता और निर्देशक के तौर पर भी वहां काम करना पड़ा. साल 1947 में जब प्रभात फिल्म कम्पनी बंद हुई तो दत्त बॉम्बे आ गए. बॉम्बे आने के बाद दत्त ने उस समय के दो बड़े निर्देशकों के साथ काम किया, जिनमें अमिया चक्रवर्ती और ज्ञान मुखर्जी शामिल थे. इस दौरान उन्होंने चक्रवर्ती की गल्र्स स्कूल और मुखर्जी की बॉम्बे टॉकीज फिल्म संग्राम में काम किया. इसके बाद अभिनेता देव आनंद ने दत्त के सामने अपनी प्रोडक्शन कम्पनी नवकेतन में निर्देशक के तौर पर काम करने का प्रस्ताव रखा. उस समय देव आनंद की कम्पनी की पहली फिल्म फ्लॉप रही थी.

गुरु दत्त ने देव आनंद के साथ जुडऩे के बाद पहली फिल्म बाजी बनाई जो कि 1951 में रिलीज हुई. यह फिल्म 1940 में हॉलीवुड में प्रचलित सस्पेंस थ्रिलर ड्रामा से प्रेरित थी. इस बीच देव आनंद और गुरु दत्त के बीच एक अनुबंध हुआ, जिसके तहत अगर दत्त कोई फिल्म बनाते हैं तो उन्हें देव आनंद को उसमें हीरो लेना होगा, वहीं अगर देव आनंद कोई फिल्म प्रोड्यूस करते हैं तो उन्हें निर्देशक के तौर पर दत्त को रखना होगा. इस अनुबंध के तहत जहां आनदं ने दत्त को फिल्म बाजी का निर्देशक बनाया, वहीं दत्त ने अपनी फिल्म सी.आई.डी. में आनंद को बतौर हीरो साइन किया. गुरु दत्त के निधन के बाद देव आनंद ने कहा था कि, गुरु दत्त एक युवा व्यक्ति थे और उन्हें ऐसी उदासीन फिल्में नहीं बनानी चाहिए थीं. दत्त और आनंद ने मिलकर हिन्दी सिनेमा को बाजी और जाल जैसी दो हिट फिल्में दीं. लेकिन देव आनंद के चेतन आनंद जो कि पेशे से निर्देशक थे, के इन दोनों के बीच में आ जाने से यह अनुबंध टूट गया.

निर्देश के तौर पर सराहे गए Appreciation as Director

गुरु दत्त के निर्देशन में बनी फिल्म बाजी काफी सफल रही और उसके बाद आयी जाल और बाज भी सराही गईं. इन फिल्मों में दत्त के निर्देशन और उनकी टीम के काम को काफी सराहा गया. वो दत्त ही थे जिन्होंने हिन्दी सिनेमा को कॉमेडियन जॉनी वॉकर, सिनेमेटोग्राफर वी.के. मूर्ति और लेखक-निर्देशक अबरार अल्वी जैसे प्रतिभाएं खोजकर दीं. वहीदा रहमान जैसी प्रतिभावान अभिनेत्री को फिल्मों में लांच करने का श्रेय भी गुरु दत्त को ही जाता है. बाज वह फिल्म थी, जिसमें दत्त ने निर्देशन के साथ-साथ अभिनय भी किया था, क्योंकि उन्हें उस रोल के लिए कोई उपयुक्त अभिनेता नहीं मिला था.

आखिरकार दत्त की मेहनत रंग लाई और 1954 में आई उनकी फिल्म आर-पार ब्लॉकबस्टर हिट रही. उनकी सफलता का सिलसिला मि. एंड मिसेज, सी.आई.डी. व सैलाब के साथ जारी रहा लेकिन 1957 में आई उनकी फिल्म प्यासा को दर्शकों ने नकार दिया. हालांकि दत्त के निधन के बाद प्यासा काफी हिट रही. दत्त ने इन पांच में से तीन फिल्मों में अभिनय भी किया था. 1959 में आई फिल्म कागज के फूल ने भी उन्हें खासा निराश किया. इस फिल्म को बनाने में उन्होंने काफी पैसा और ऊर्जा खर्च की थी. इस फिल्म की कहानी दत्त के जीवन से काफी मिलती जुलती थी, जिसमें एक मशहूर फिल्म निर्देशक एक अभिनेत्री के प्यार में पड़ जाता है. इस फिल्म की नायिका वहीदा रहमान थी और उस समय काफी चर्चे थे कि दत्त वहीदा के प्यार में थे. कागज के फूल फिल्म फ्लॉप रही और दत्त पूरी तरह से बर्बाद हो गए.

इसके बाद 1960 में आई फिल्म चौदहवीं का चांद ने फिर से दत्त को फिर से सफलता दिलाई. यह एक मुस्लिम पृष्ठभूमि पर बुनी प्रेम त्रिकोण की कहानी थी जिसमें दत्त के अलावा वहीदा रहमान और रहमान ने अभिनय किया था. इस फिल्म का एक गाना ‘चौदहवी का चांद हो…’ काफी लोकप्रिय रहा था. यह गाना रंगीन फिल्माया गया था. यह एकमात्र गाना है जिसमें गुरुदत्त को रंगीन फिल्म में देखा जा सकता है.इसके बाद आई फिल्म साहिब बीबी और गुलाम को दर्शकों और आलोचकों ने काफी पसंद किया. यह फिल्म अबरार अल्वी ने लिखी थी. फिल्म में मीना कुमारी, वहीदा रहमान, रहमान और दत्त ने अभिनय किया था. बाद में वहीदा ने उन अफवाहों को भी खारिज किया था, जिनमें कहा गया था कि पर्दे के पीछे दत्त ने ही यह फिल्म लिखी थी.

अंतिम फिल्म Last Film of Guru Dutt

वर्ष 1964 में दत्त की अंतिम फिल्म आई सांझ और सवेरा. इस फिल्म को ऋषिकेश मुखर्जी ने निर्देशित किया था और इसमें उनके साथ मीना कुमारी थीं. ‘बहारें फिर भी आएंगी’ दत्त की आखिरी फिल्म थी, जिसके बीच में ही उनका निधन हो गया. बाद में दत्त की जगह धर्मेन्द्र को इस फिल्म में लेकर दोबारा बनाया गया. 1966 में रिलीज हुई यह फिल्म उनकी टीम प्रोडक्शन की अंतिम फिल्म साबित हुई.

गुरु दत्त का निधन Death of Guru Dutt

10 अक्टूबर, 1964 को गुरु दत्त बॉम्बे के पेडर रोड़ स्थित अपने किराए के अपार्टमेंट में अपने बिस्तर पर मृत पाए गए थे. तब कहा गया था कि उन्होंने शराब और नींद की गोलियां काफी ज्यादा मात्रा में ले ली थीं इसलिए उनका निधन हो गया. हालांकि यह पता नहीं चल पाया कि उन्होंने आत्महत्या की थी या फिर यह एक दुर्घटना थी. वैसे यह आत्महत्या का उनका तीसरा प्रयास माना गया. गुरु दत्त के बड़े बेटे अरुण दत्त ने उनके निधन को दुर्घटना बताया. निधन के अगले दिन दत्त ने अभिनेत्री माला सिन्हा और अभिनेता राज कपूर को अपने घर अगली फिल्म ‘बहारें फिर भी आएंगी’ पर चर्चा करने के लिए बुलाया था. दत्त के बेटे अरुण के अनुसार, गुरु दत्त को नींद न आने की बीमारी थी और इसके लिए वे नींद की गोलियां लिया करते थे. उस दिन वह नशे में थे और इस कारण उन्होंने नींद की ज्यादा गोलियां खा ली थीं जो कि उनकी मौत का कारण बन गईं. निधन से पहले दत्त दो प्रोजेक्ट करने वाले थे, जिनमें साधना अभिनीत ‘पिकनिक’ और के.आसिफ की फिल्म ‘लव एंड गॉड’ शामिल थी. पिकनिक जहां अधूरी रह गई, वहीं लव एंड गॉड दो दशक बाद अभिनेता संजीव कुमार के साथ बनाई गई.

निजी जीवन Personal Life of Guru Dutt

वर्ष 1953 में गुरु दत्त ने गायिका गीता राय चौधरी से विवाह किया था. तीन साल तक सगाई रहने के बाद दोनों ने शादी की. इन दोनों के तीन बच्चे तरुण, अरुण और नीना हुए. अपने माता-पिता के निधन के बाद तीनों बच्चे दत्त और गीता के भाइयों के यहां पले बढ़े. वैसे यह सभी जानते हैं कि दत्त अपनी शादीशुदा जिंदगी से खुश नहीं थे. दत्त के भाई आत्माराम के अनुसार, गुरु दत्त जितने अनुशासित और गंभीर अपने काम को लेकर थे, उतने ही अनुशासनहीन और लापरवाह अपनी जिंदगी को लेकर थे. वे काफी मात्रा में धूम्रपान करते थे और शराब पीते थे. समय को लेकर भी पाबंद नहीं थे.

अभिनेत्री वहीदा रहमान के साथ रिश्ते ने भी दत्त की शादी को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई. निधन से कुछ पहले ही दत्त का पत्नी गीता से अलगाव हो गया था और वह अकेले ही रह रहे थे. साल 1972 में महज 41 की उम्र में गीता दत्त का निधन हो गया था. उनका निधन ज्यादा शराब पीने से लीवर खराब होने के कारण हुआ. गुरु दत्त के सहकर्मी और करीबी दोस्त अबरार अल्वी ने एक साक्षात्कार में कहा था कि दत्त किसी से भी खुलकर बात नहीं करते थे. उन्हें अपनी समस्याओं पर किसी से चर्चा करना पसंद नहीं था.

गुरु दत्त अभिनीत फिल्में Filmography of Guru Dutt

– सांझ और सवेरा (1964)
– सुहागन (1964)
– बहुरानी (1963)
– भरोसा (1963)
– साहिब बीबी और गुलाम (1962)
– सौतेला भाई (1962)
– चौदहवीं का चांद (1960)
– कागज के फूल (1959)
– 12 ओ क्लोक (1958)
– प्यासा (1957)
– मि. एंड मिसेज 55 (1955)
– आर पार (1954)
– बाज (1953)
– हम एक हैं (1946)
– लेखा रानी (1945)
– चांद (1944)

गुरु दत्त निर्देशित फिल्में Films Directed by Guru Dutt

  • बाजी
  • जाल
  • बाज
  • आर पार
  • मि. एंड मिसेज 55
  • सैलाब
  • प्यासा
  • कागज के फूल

गुरु दत्त निर्मित फिल्में Film Produced by Guru Dutt

  • आर पार
  • सी.आई.डी
  • प्यासा
  • कागज के फूल
  • चौदहवीं का चांद
  • साहिब बीबी और गुलाम
  • बहारें फिर भी आएंगी
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