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जवाहरलाल नेहरू की जीवनी Jawaharlal Nehru Biography in Hindi

जवाहरलाल नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है. उन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपने जीवन के 3259 दिल जेल में बिताए. पंडित जवाहरलाल नेहरू  करीब 16 वर्ष 8 माह तक स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री रहे और आजादी के बाद भारत के नवनिर्माण की आधारशिला रखी. 

संक्षिप्त जीवनी Brief Biographay

जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे. जवाहरलाल का जन्म 14 नवम्बर, 1889 को प्रयागराज (इलाहाबाद) के एक प्रतिष्ठित कश्मीरी परिवार में हुआ. उन्होंने इलाहाबाद में अपने पैतृक निवास आनंद भवन में सुख, ऐश्वर्य से भरा बचपन बिताया और 16 वर्ष तक आरम्भिक शिक्षा घर पर ही प्राप्त की. इसके बाद, जवाहरलाल ने स्नातक और कानून की पढ़ाई इंग्लैंड से पूरी की और बैरिस्टर बन कर भारत लौटे.

पंडित जवाहरलाल नेहरू  1912 में भारत लौटते ही कांग्रेस पार्टी से जुड़कर देश के स्वतंत्रता आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने लगे. पंडित नेहरू ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए सभी प्रमुख आंदोलनों में भाग लिया. उन्होंने वर्ष 1920 से लेकर 1945  के दौरान करीब 9 बार अलग-अलग अवधि में कुल 9 साल जेल में बिताए.

जवाहरलाल नेहरू ने 14 -15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में पद की शपथ ली. भारत का प्रथम प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी दूरदृष्टि, दृढ़ इच्छाशक्ति और कर्मठता से आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखी. बच्चों के प्रति अपार स्नेहभाव रखने के कारण पंडित जवाहरलाल नेहरू को चाचा नेहरू भी कहा जाता है और उनकी जयन्ती 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है. 

नामपंडित जवाहरलाल नेहरू
उपनाम चाचा नेहरू
जन्म एवं जन्मस्थान14 नवम्बर 1889, प्रयागराज (इलाहाबाद), भारत
मृत्यु एवं मृत्यु स्थान27 मई 1964, नई दिल्ली, भारत
कार्यस्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री
शिक्षामिडि टेम्पल इन, लंदन से बैरिस्टर की पढ़ाई

जवाहरलाल नेहरू का आरम्भिक जीवन एवं शिक्षा Early Life & Education

जवाहरलाल नेहरू के पिता पंडित मोतीलाल नेहरू एक सुविख्यात वकील थे और कानून की गहरी जानकारी के कारण भारत भर में प्रसिद्ध थे.अपनी योग्यता से पंडित मोतीलाल नेहरू ने भरपूर समृद्धि हासिल की थी. जवाहरलाल की मां स्वरूप रानी नेहरू मूलरूप से लाहौर के एक प्रसिद्ध कश्मीरी परिवार से ताल्लुक रखती थीं. जवाहरलाल नेहरू की दो बहनें थीं- विजय लक्ष्मी और कृष्णा.

जवाहरलाल का पालन-पोषण इलाहाबाद के विख्यात आनंंद भवन में सुख- सुविधा परिपूर्ण वातावरण में हुआ. जवाहरलाल को वर्ष 1896 में इलाहाबाद के सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने भेजा गया. लेकिन 6 माह बाद ही उन्हें स्कूल से हटा लिया गया और 16 वर्ष तक घर पर ही शिक्षा प्राप्त की.

जवाहरलाल का दाखिला मई 1905 में  इंग्लैंड के ‘हैरो काॅलेज’ में कराया गया. अध्ययन के लिए वहां का वातावरण उनके बिलकुल अनुकूल था. 1907 मे उन्होंने ‘कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय’ के ट्रिनिटी काॅलिज में प्रवेश लिया. वहां से जन्तु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान एवं रसायन शास्त्र विषयों के साथ स्नातक किया. काॅलेज की शिक्षा समाप्त करके जवाहरलाल नेहरू ने मिडिल टेम्पल इन्स ऑफ कोर्ट स्कूल ऑफ लॉ में बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया.

जवाहरलाल नेहरू ने बैरिस्टर बनने के बाद इलाहाबाद वापस आकर अपने पिता के साथ वकालत शुरू कर दी. इसके साथ ही उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यों के लिए समय देना शुरू कर दिया. 1912 में वे बाँकीपुर में कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में सम्मिलित हुए.

जवाहरलाल नेहरू का पारिवारिक जीवन
Family Life of Jawaharlal Nehru

जवाहरलाल नेहरू का विवाह 26 वर्ष की आयु में लाहौर निवासी जवाहरमल मूल अटल कौल के साथ 8 जून 1916 को दिल्ली की हक्सर हवेली में हुआ. उनके घर 19 नवम्बर 1917 को एक पुत्नारी का जन्म हुआ, जिसका नाम इंदिरा प्रियदर्शनी रखा गया. 1922 में एक पुत्र भी हुआ, परन्तु दुर्भाग्यवश वह जीवित न रह सका. 

जवाहरलाल एवं कमला नेहरू का शुरुआती विवाहित जीवन पारिवारिक पृष्ठभूमि में अंतर के कारण विरोधाभासों से भरा रहा. कमला नेहरू परंपरागत सोच वाले रूढ़िवादी कश्मीरी परिवार से थीं, जबकि जवाहरलाल नेहरू के परिवार का झुकाव पश्चिमी जीवन शैली की तरफ था.  राजनीतिक गतिविधियों के कारण जवाहरलाल नेहरू अपनी पत्नी कमला नेहरू के साथ अधिक समय नहीं बिता पाते थे. शीघ्र ही कमला नेहरू ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेना प्रारंभ कर दिया.

1930 में कमला नेहरू टीबी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गईं. देश-विदेश के कई बड़े अस्पतालों में उनका इलाज कराया गया. जवाहरलाल नेहरू ने इस दौरान अपना अधिकतर समय उनके साथ ही बिताया. 28  फरवरी 1936  को कमला नेहरू का देहावसान स्विटज़रलैंड के लौसेन में हो गया।

जवाहरलाल नेहरू का राजनीतिक करिअर Political Career of Jawahrlal Nehru

जवाहरलाल नेहरू वर्ष 1920 तक  वकालत का कार्य करते जरूर रहे, लेकिन उनका मन राजनीतिक क्षेत्र में आने के लिए छटपटा रहा था. गोपाल कृष्ण गोखले की अपील पर उन्होंने 50 हजार का चन्दा जमा करके प्रवासी भारतीयों की सहायता के लिए अफ्रीका भिजवाया. उन्होंने डाॅ. एनी बेसेण्ट और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की ‘होमरूल लीग’ में भी खूब कार्य किया. 

जवाहरलाल नेहरू का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

Contribution of Jawaharlal Nehru in freedom struggle 

1920 में जब महात्मा गांधी ने विदेशी बहिष्कार और खिलाफत आन्दोलन प्रारम्भ किया, तो  जवाहरलाल ने उसमें पूरे उत्साह से भाग लिया. 1921 में उन्हें 6  महीने और 1922 में 18 महीने की कैद हुई. 1922 में उन्हें इलाहाबाद म्युनिसिपैलिटी का अध्यक्ष चुना गया. उन्होंने कई मज़दूर यूनियनों के साथ भी कार्य किया.

1926 में जब वे पत्नी  कमला नेहरू का स्वास्थ्य खराब होने पर स्विट्जरलैंड गए, तो यूरोप में भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया. 1927 में वे जिनेवा में साम्राज्य विरोधी संघ के अधिवेशन में भारतीय राष्ट्र सभा के प्रतिनिधि के रूप में सम्मिलित हुए. उसी वर्ष वे सोवियत-संघ के दसवें वार्षिक समारोह में सम्मिलित होने के लिए सपरिवार मॉस्को गये. कुछ दिन मॉस्को में रहकर उन्होंने साम्यवादी विचारधाराओं का विशद अध्ययन किया. 

पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव

जब वे अपनी यूरोप-यात्रा से लौटकर भारत आए तो उन्हीं दिनों कलकत्ता में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, किन्तु उसमें पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव पास न हो सका. इससे असन्तुष्ट होकर जवाहरलाल नेहरू ने 1928 में इंडिपेन्डेन्स फ़ॉर इंडिया लीग की स्थापना की जिसका लक्ष्य पूर्ण स्वाधीनता प्राप्त करना था. इसी समय साइमन-कमीशन भारत में आया.  उन्होंने लखनऊ में  इसका विरोध किया, जिसमें उन्हें लाठी चार्ज का सामना करना पड़ा. 

1929 में लाहौर में जवाहरलाल नेहरू के सभापतित्व में  कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में 31 दिसम्बर को रावी नदी के तट पर स्वाधीनता-प्राप्ति की शपथ ली गई.  गांधी जी ने 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ किया. कानून तोड़े गए और जेलें भर दी गई. जवाहरलाल नेहरू को भी एक साल तक जेल में रहना पड़ा.

इस बीच, पंडित मोतीलाल नेहरू बीमार हो गए. जवाहरलाल और उनके बहनोई रणजीत पण्डित को छोड़ दिया गया. किन्तु पंडित मोतीलाल की दशा में कोई सुधार न हुआ और उनका निधन हो गया.

1931 में जब गांधी जी गोलमेज सम्मेलन से भारत लौटे तो उन्हें बम्बई आते ही गिरफ्तार कर लिया गया. पंडित जवाहरलाल नेहरू जब गांधी जी से मिलने बम्बई जा रहे थे, उन्हें रेल में ही गिरफ्तार कर लिया गया. अन्य नेता भी पकड़ लिये गये. पं. नेहरू को प्रायः नैनी जेल में रखा जाता था. अब की बार उन्हें देहरादून जेल में लाया गया. 2 वर्ष कैद में रहने के पश्चात उन्हें मुक्त किया गया, परन्तु कुछ ही महीनों के बाद उन्हें बन्दी  बना लिया गया.   जवाहरलाल नेहरू ने देहरादून जेल में ही अपनी आत्मकथा एन ऑटोबायोग्राफी और ग्लिम्पसेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री लिखी.

इसी बीच, उनकी पत्नी का स्वास्थ्य फिर बिगड़ गया और उन्हें इलाज के लिए जर्मनी ले जाया गया. नेहरू जी को मुक्त कर दिया गया. 26 फरवरी, 1936 को कमला नेहरू का निधन हो गया. 

जवाहरलाल नेहरू ने 1939 में लंका की यात्रा कर वहां भारतीयों को लेकर बने कटु वातावरण को दूर किया. अगस्त में उन्होंने चीन जाकर राष्ट्रपति मार्शल च्यांग काई शेक से मैत्री-सम्बन्ध स्थापित किये. 

वर्ष 1942 में जब ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पास हुआ तो अन्य नेताओं के साथ जवाहरलाल नेहरू को भी गिरफ्तार कर लिया गया. 1945 में वेवल-योजना के अनुसार अन्य नेताओं के साथ उन्हें भी रिहा किया गया.  उन्होंने 1943-45 के दौरान जेल में सबसे लंबा समय बिताया. फिर शिमला सम्मेलन और कैबिनेट मिशन की बातचीत में भी वे बराबर भाग लेते रहे. 2 सितम्बर 1946 को उन्होंने भारत की अंतरिम सरकार का नेतृत्व किया.

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू   

First PM of India Jawaharlal Nehru

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 14 एवं 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की. इस रात संसद भवन में उन्होंने अपना प्रसिद्ध भाषण  ट्रिस्ट विद डेस्टिनी  दिया. उन्होंने भारत के विदेश मंत्रालय का कार्यभार भी संभाला. 

स्वतंत्र भारत में जवाहरलाल नेहरू का योगदान

Jawaharlal Nehru’s contribution in Free India 

जवाहरलाल नेहरू का सपना था कि भारत एक स्वतंत्र, सार्वभौम लोकतांत्रिक गणतंत्र बने. उनके नेतृत्व में भारत सरकार ने देश के सामने आई शुरुआती चुनौतियों का सामना करना पड़ा.  जवाहरलाल नेहरू ने देश को विश्व के उन्नत राष्ट्रों की कतार में खड़ा करने के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया. सरकार ने देश विभाजन के बाद  लाखों विस्थापितों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया. जवाहरलाल नेहरू ने भारत के संविधान की रचना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

नेहरू सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र दोनों को आगे बढ़ाने वाली मिश्रित अर्थव्यवस्था के हिमायती थे. उन्होंने ज़मींदारी प्रथा समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे बड़ी संख्या में भूमिहीनों को भी भूमि मिली. 

जवाहरलाल नेहरू के समय में हिंदू सिविल कोड में सुधार किया गया, जिससे हिंदू विधवाओं को भी उत्तराधिकार और सम्पत्ति के मामले में पुरुषों के बराबर अधिकार मिले. छुआछूत को भी अपराध घोषित किया गया. राज्य की सीमाओं का भाषा के आधार पर पुनर्गठन किया गया.

नेहरू ने भारत के परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष कार्यक्रमों को प्रोत्साहन दिया. वे बड़े  तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सी. एस. आई. आर.) के अंतर्गत प्रयोगशालाओं की एक श्रृंखला की स्थापना की.

जवाहरलाल नेहरू ने बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजनाओं को आधुनिक भारत के मंदिर बताते हुए भाखड़ा नंगल तथा हीराकुड जैसे बड़े बांधों की नींव रखी. उन्होंने भिलाई, राउरकेला एवं दुर्गापुर जैसे बडे़ इस्पात कारखानों की स्थापना भी की.  नेहरू ने भारत में सरकारी क्षेत्र में कई बड़े शिक्षण संस्थानों जैसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स),  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) की स्थापना की.

जवाहरलाल नेहरू की विदेश नीति

Foreign policy of Jawaharlal Nehru 

नेहरू जी विदेश नीति में ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर के रास्ते पर चलने में विश्वास करते थे. उनकी विदेश नीति गुट निरपेक्षता एवं पंचशील के सिद्धांत पर आधारित थी.  पड़ोसी देशों के साथ मधुर एवं मजबूत संबंध स्थापित करने की पहल की. हालांकि, पाकिस्तान और चीन के साथ अनेक प्रयासों के बाद भी वे रिश्तों में मधुरता नहीं ला पाए. उन्होंने ‘हिंदी चीनी भाई भाई’ को बढ़ावा देते हुए चीन के साथ मित्रता का प्रयास किया, लेकिन 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया.

चीन के आक्रमण से जवाहरलाल नेहरू काे बड़ा सदमा लगा. कहा जाता है कि यही जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु की वजह भी बनी. जवाहरलाल नेहरू का 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. 

जवाहरलाल नेहरू को 1955 में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. 

जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखित पुस्तकें

Books written by Jawaharlal Nehru

जवाहरलाल नेहरू के भाषणों और विचारों के संकलन पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्वयं लिखित पुस्तकें इस प्रकार हैं.

  • पुत्री इंदिरा प्रियदर्शिनी को लिखे पत्रों का संकलन लेटर्स फ्रॉम अ फादर टु हिज डॉटर.
  •  आत्मकथा मेरी कहानी ( एन ऑटोबायोग्राफी)
  • विश्व इतिहास की झलकियां (ग्लिम्पसेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री)
  • भारत एक खोज (डिस्कवरी ऑफ इंडिया)

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