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अभिनव बिंद्रा की जीवनी Abhinav Bindra Biography in Hindi

अभिनव बिंद्रा भारतीय राइफल शूटर हैं, जिन्होंने ओलम्पिक खेलों में भारत को पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रचा.

संक्षिप्त जीवनी Brief Biographay

अभिनव बिंद्रा भारत को ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक दिलाने वाले पहले खिलाड़ी हैं. अभिनव ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्द्धा में स्वर्ण पदक जीत कर यह इतिहास रचा. निशानेबाजी के साथ-साथ खानदानी व्यापार संभालने वाले अभिनव ने भारत को 1980 के 28 साल बाद ओलंपिक में पहला स्वर्ण पदक दिलाया. इससे पहले, 1980 ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने अंतिम बार स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था. अभिनव पहले ऐसे निशानेबाज भी हैं, जिनके नाम एक ही समय पर विश्व खिताब और ओलंपिक स्वर्ण पदक दोनों रहे. 2008 ओलंपिक से पहले उन्होंने 2006 में हुई आईएसएसएफ विश्व निशानेबाजी चैम्पियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता था. ओलंपिक के बाद बिंद्रा ने 2014 ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीतने का कारनामा किया. मई, 2016 में भारतीय ओलंपिक संघ ने बिंद्रा को रियो डी जिनेरियो ओलंपिक के लिए भारत में गुडविल एम्बेसडर भी नियुक्त किया था. रियो ओलंपिक में बिंद्रा 10 मीटर एयर राइफल स्पर्द्धा में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद चौथे स्थान पर रहते हुए पदक से चूक गए. इसके तुरंत बाद ही 5 सितम्बर, 2016 को बिंद्रा ने निशानेबाजी को अलविदा कह दिया.

नामअभिनव बिंद्रा
जन्म एवं जन्मस्थान28 सितम्बर, 1982, देहरादून, उत्तराखण्ड, भारत
पेशाखिलाड़ी व उद्यमी
स्पर्द्धाराइफल शूटिंग
शिक्षाबैचलर्स इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन

अभिनव बिंद्रा का आरम्भिक जीवन एवं शिक्षा Early Life & Education

 28 सितम्बर, 1982 को जन्मे अभिनव बिंद्रा के पिता का नाम अपजित बिंद्रा और मां बबली बिंद्रा है. पंजाबी परिवार में जन्मे अभिनव बिंद्रा की स्कूली शिक्षा दून स्कूल से हुई, लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए वह चंडीगढ़ के सेंट स्टीफंस कॉलेज चले गए. वर्ष 2000 में उन्होंने स्टीफंस कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की. दून स्कूल में ही बिंद्रा ने निशानेबाजी सीखना शुरू किया. बेटे की लगन को देखते हुए अपजित बिंद्रा ने पटियाला में अपने घर में ही अभिनव के लिए एक इंडोर शूटिंग रेंज स्थापित कर दी. अभिनव के मेंटोर डॉ. अमित भट्टाचार्य हैं जो कि करियर की शुरुआत से ही उनके साथ जुड़े हुए थे. लेकिन अभिनव के अंदर छिपी प्रतिभा को उनके पहले कोच रहे लेफ्टिनेंट कर्नल ढिल्लन ने  पहचाना.

अपनी लगन और मेहनत के दम पर ही अभिनव वर्ष 2000 में सिडनी में हुए ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में सफल रहे. वह ओलंपिक में उतरने वाले सबसे युवा भारतीय खिलाड़ी बने. अभिनव ने बाद में स्विट्जरलैंड की ग्रेब्रिएला भुलमान से भी ट्रेनिंग ली, जो कि खुद पांच बार की ओलंपियन थीं. ओलंपिक से पहले बिंद्रा ने उनसे जर्मनी में ट्रेनिंग ली थी. सिडनी ओलंपिक में अभिनव ने 590 अंक अर्जित किए और क्वालीफाइंग राउंड में 11वें स्थान पर रह कर होड़ से बाहर हो गए. फाइनल राउंड में शीर्ष आठ निशानेबाज ही हिस्सा लेते हैं.

अभिनव बिंद्रा का खेल करिअर Sports Career of Abhinav Bindra

अभिनव बिंद्रा ने15 साल की उम्र में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने के बाद दो साल में ही अपने प्रदर्शन से सबका दिल जीत लिया. अंतरराष्ट्रीय पदार्पण के दो साल के भीतर ही उन्हें अर्जुन अवार्ड और फिर अगले ही साल देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड से नवाजा गया. बिंद्रा का पहला अंतरराष्ट्रीय पदक 2001 में आया, जब उन्होंने म्यूनिख में हुए विश्व कप में कांस्य पदक जीता. उस टूर्नामेंट में उन्होंने 600 में 597 अंक जुटाकर जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाया.

वर्ष 2001 बिंद्रा के करियर के लिए बेहद यादगार रहा, जब उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में छह स्वर्ण पदक जीते. 2002 में मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में बिंद्रा ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्द्धा के युगल वर्ग में स्वर्ण पदक और व्यक्तिगत वर्ग में रजत पदक जीता था. 2004 एथेंस ओलंपिक में बिंद्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वालीफाइंग राउंड में 597 अंक अर्जित कर ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़ा. क्वालीफाइंग राउंड में तीसरे स्थान पर रहे बिंद्रा हालांकि फाइनल में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सके और पदक से चूक गए. फाइनल राउंड में क्वान झाउ और ली जी ने क्रमश: 599 व 598 अंक जुटा बिंद्रा के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. वहीं बिंद्रा 97.6 अंक लेकर आठ निशानेबाजों में सबसे अंतिम पायदान पर रहे. आठ निशानेबाजों में बिंद्रा ही थे जो कि 100 से भी कम अंक हासिल कर पाए थे.

अभिनव बिंद्रा के शूटिंग करियर का स्वर्णिम समय Golden Period of Abhinav’s Shooting Career 

बिंद्रा के करियर का सुनहरा दौर वर्ष 2006 से शुरू हुआ. 24 जुलाई, 2006 को अभिनव ने जागरेब में हुई आईएसएसएफ विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीत इतिहास रचा. वह विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने. उनसे पहले 1962 में डॉ. करणी सिंह ने विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक हासिल किया था. इसी साल मेलबर्न में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में बिंद्रा ने टीम स्पद्र्धा में स्वर्ण पदक जीता, जबकि व्यक्तिगत स्पद्र्धा में वह कांस्य पदक ही जीत पाए.

2006 में दोहा एशियाई खेलों में हालांकि अभिनव पीठ में चोट के चलते हिस्सा नहीं ले पाए थे. उनकी चोट काफी गंभीर थी, करीब एक साल तक अभिनव रेंज से बाहर रहे वह निशाना साधना तो दूर राइफल उठाने तक की स्थिति में नहीं थे. लेकिन उन्होंने एक साल बाद वापसी की और 2008 बीजिंग ओलंपिक की तैयारी शुरू की. विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही अभिनव ने ओलंपिक कोटा हासिल कर लिया था.

अभिनव बिंद्रा का ओलम्पिक स्वर्ण पदक Abhinav Bindra’s Olympic Gold Medal 

चीन के बीजिंग में हुए 2008 ओलंपिक में अभिनव ने वो कर दिखाया जो उससे पहले तक कोई भारतीय नहीं कर पाया था. उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पद्र्धा में 700.5 अंक स्कोर कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया. अभिनव ने क्वालीफाइंग राउंड में 596 अंक हासिल किए और चौथे स्थान पर रहे. फाइनल राउंड में फिर उन्होंने 104.5 अंक लेकर खिताब अपने नाम किया.

फाइनल राउंड में उन्होंने पहला शॉट 10.7 का लगाया. उनका कोई भी शॉट 10 से नीचे नहीं गया. हालांकि फिनलैंड के हैनरी हैकीनेन और बिंद्रा का स्कोर बराबर रहा, जिससे मुकाबला फाइनल शूटऑफ में पहुंचा. बिंद्रा ने यहां 10.7 का स्कोर किया, जबकि हैनरी 9.7 अंक ही स्कोर कर सके. इस स्पर्द्धा का रजत पदक चीन के झु किनान ने जीता.

2010 राष्ट्रमंडल खेल में भारतीय दल के ध्वजवाहक

ओलंपिक पदक जीतने के बाद बिंद्रा हर खिलाड़ी के आदर्श बन गए. उनकी इस उपलब्धि को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2010 में भारत की मेजबानी में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह में उन्हें ध्वजवाहक चुना गया. साथ ही 71 देशों के करीब सात हजार खिलाड़ियों की ओर से एथलीट्स ऑथ भी उन्होंने ही ली.

दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भी बिंद्रा ने एक स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल किया. गगन नारंग के साथ अभिनव ने 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्द्धा का स्वर्ण पदक जीता. दोनों ने मिलकर 1193 अंक जुटाए और गेम्स रिकॉर्ड कायम किया. यह दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का पहला स्वर्ण पदक भी था. हालांकि व्यक्तिगत स्पर्द्धा में अभिनव रजत पदक ही जीत पाए. उनके हमवतन नारंग ने अपने ही रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए 600 अंक लेकर स्वर्ण पदक जीता.

इसके बाद दोहा के कतर में हुई एशियन शूटिंग चैम्पियनशिप में भी अभिनव स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे. 2012 में लंदन में हुए ओलंपिक में हालांकि अभिनव अपना खिताब बचा नहीं पाए, वह क्वालीफाइंग राउंड में निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए 594 अंकों के साथ 16वें स्थान पर रहे. इसी स्पर्द्धा में भारत के गगन नारंग कांस्य पदक जीतने में सफल रहे. हालांकि 2014 में ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में अभिनव ने शानदार वापसी की और स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे.

2016 रियो डी जिनेरियो ओलंपिक में अभिनव का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन वह फाइनल राउंड में शूट ऑफ में चूक गए और चौथे स्थान पर रहे. उन्हें शूटऑफ में हराने वाले यूक्रेन के शैरी कुलिश स्पर्द्धा का रजत पदक जीतने में सफल रहे.

अभिनव बिंद्रा का बिजनेस  करियर Business Interests of Abhinav Bindra 

बिंद्रा अभिनव फ्यूचरिस्टिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं और देश में वॉल्टर आर्म्स के अकेले सप्लायर हैं. उनकी कम्पनी वॉल्टर ब्रांड की पिस्टल देश में सप्लाई करती है. देशभर के कई पुलिस विभाग में उनकी पिस्टल सप्लाई होती हैं. इसके अलावा उनके सैमसंग, बीएसएनएल और सहारा ग्रुप के साथ भी टाईअप रहे हैं.

अभिनव बिंद्रा के बारे में रोचक जानकारियां  Intersting Facts about Abhinav Bindra

अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा को भी लोगों ने काफी पसंद किया. अक्टूबर, 2011 में ‘ए शॉट एट हिस्ट्री: माय ओब्सेसिव जर्नी टू ओलंपिक गोल्ड’ नाम से उन पर लिखी गई किताब रिलीज हुई. इसे हार्पर स्पोट्र्स ने पब्लिश किया था जबकि बिंद्रा के साथ लेखक रोहित बृजनाथ ने इसे लिखा था.

बिंद्रा के जीवन पर फिल्म बनने की खबरें भी सामने आई है, जिनमें उनकी भूमिका हर्षवर्धन कपूर निभा सकते हैं.

वर्तमान में वह पुशान जैन के कोच व मेंटर के तौर पर कार्य कर रहे हैं.

अभिनव बिंद्रा को मिले पुरस्कार एवं  उपलब्धियां Achievements & Awards

  • 15 साल की उम्र में 1998 राष्ट्रमंडल खेलों में लिया हिस्सा, सबसे युवा खिलाड़ी बने.
  • 18 साल की उम्र में राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड पाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने.
  • ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्द्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी.
  • वर्ष 2000 में अर्जुन अवार्ड. 
  • वर्ष 2001 में राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड
  • वर्ष 2009 में पद्म भूषण

पदक तालिका 

2008, बीजिंग ओलंपिक: स्वर्ण पदक (10 मी. एयर राइफल)
2006, जागरेब विश्व चैम्पियनशिप: स्वर्ण पदक (10 मी. एयर राइफल)
2002, मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेल: स्वर्ण पदक (10 मी. एयर राइफल) टीम स्पर्द्धा
2002, मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेल: रजत पदक (10 मी. एयर राइफल) व्यक्तिगत स्पर्द्धा
2006, मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेल: स्वर्ण पदक (10 मी. एयर राइफल) टीम स्पर्द्धा
2006, मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेल: कांस्य पदक (10 मी. एयर राइफल) व्यक्तिगत स्पर्द्धा
2010, दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल: स्वर्ण पदक (10 मी. एयर राइफल) टीम स्पर्द्धा
2010, दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल: रजत पदक (10 मी. एयर राइफल) व्यक्तिगत स्पर्द्धा
2014, ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल: स्वर्ण पदक (10 मी. एयर राइफल) व्यक्तिगत स्पर्द्धा
2010, ग्वांगझु एशियन गेम्स: रजत पदक (10 मी. एयर राइफल) टीम स्पर्द्धा
2014, इंचियोन एशियन गेम्स: कांस्य पदक (10 मी. एयर राइफल) टीम स्पर्द्धा
2014, इंचियोन एशियन गेम्स: कांस्य पदक (10 मी. एयर राइफल) व्यक्तिगत स्पर्द्धा

अभिनव बिंद्रा के कोट्स – Quotes of Abhinav Bindra

दून स्कूल में पढ़ाई के दौरान हमें किसी एक खेल को चुनना जरूरी था, मैंने निशानेबाजी को चुना. लेकिन धीरे-धीरे मुझे इस खेल से प्यार हो गया.

मुझमें कोई प्रतिभा नहीं है, हां लेकिन मैं नियमित अभ्यास करता हूं और पूरी ईमानदारी और लगन से अपने खेल पर ध्यान केन्द्रित करता हूं.

मेरा एक ही सपना था कि मैं जिला स्तरीय प्रतियोगिता में पदक जीतूं. जिस दिन से मैंने निशानेबाजी का अभ्यास शुरू किया, उस दिन से ही मेरी यही ख्वाहिश थी. उसके बाद जो भी मिला चाहे वह ओलंपिक स्वर्ण पदक ही क्यों न हो, मेरे लालचीपन और खेल के प्रति मेरे प्यार का ही परिणाम है. मेरा मानना है कि ओलंपिक पदक जीतने से ज्यादा खुशी मुझे जिला स्तरीय प्रतियोगिता में पदक जीतने पर हुई थी क्योंकि वह मेरा पहला पदक था.

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